धर्म क्या है?

हमधर्म’ शब्द के अर्थ को समझने का प्रयास करेंगे। वास्तव में यह संस्कृत का शब्द है जो ग्रीक, लैटिन और फारसी भाषा की तरह ही एक प्राचीन भाषा है और हर शास्त्रीय भाषा की तरह संस्कृत में भी अधिकतर शब्द कुछ मूल शब्दों से उत्पन्न हुए हैं।

धर्म को मूल शब्द 'धृसे लिया गया है जिसका अर्थ है धारण करना, पास रखना, या संचालन करना। इसलिए जो है धारण करता है, पास रखता है या संचालन करता है वही धर्म है। धर्म पूरे ब्रह्मांड की व्यवस्था को बनाए रखता है। इस संदर्भ में धर्म का अर्थ ब्रह्मांड में संतुलन बनाए रखने वाले चक्रीय गतिविधियों के सही संचालन है।

धर्म का अर्थ नैतिकता भी है क्योंकि यह हमें सत्य के निकट ले जाता है, जिस सत्य से ब्रह्माण्ड की व्यवस्था बनी रहती है, इसे ऋतः भी कहते हैं। एक व्यक्ति के लिए स्व-धर्म उसका अपना धर्म है जिसे उसने स्वयं चुना है या उसके सामाजिक स्थान के कारण उसे करना है।

धर्म का अर्थ लोगों की आस्था और परंपरा भी होता है। क्योंकि ऋषि-मुनियों के ध्यान और सिद्धियों से इन परंपराओं को मजबूती मिली है। ये परंपराएं शाश्वत हैं इसलिए इसे सनातन धर्म भी कहा जाता है। धर्म अंग्रेजी के शब्दरिलीजन’ का समानार्थक नहीं है। रिलीजन का अर्थ विश्वास से बंधा हुआ एक समूह है।

‘धर्म’ शब्द का अनुवाद अंग्रेजी में नहीं किया जा सकता इसके कई अर्थ हैं। इसका एक और अर्थ गुण, विशेषता और प्रकृति है। अगर कोई कहता है कि तरलता पानी का धर्म है इसका अर्थ है कि तरलता पानी का गुण है। धर्म किसी वस्तु या व्यक्ति की अंतर्निहित प्रकृति भी हो सकती है। उदाहरण के लिए जलना आग का धर्म है।

धर्म का एक अर्थ सामाजिक कानून भी है। इन कानूनों को सामाजिक ताने-बाने का आधार माना जाता है, इसीलिए इसे धर्म कहते हैं। मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति के समान कई सामाजिक कानून हैं। धर्म का अर्थ आदेश भी हो सकता है। सरकार या राजा के आदेश को राजधर्म कहा जा सकता है।

बौद्ध धर्म में धर्म का अतिरिक्त अर्थ गौतम बुद्ध की शिक्षा है। कुछ परंपराओं में धर्म शब्द का उपयोग बुद्ध की शिक्षाओं की टिप्पणियों और व्याख्याओं के अर्थ में किया जाता है। धर्म शब्द का अर्थ सदाचार भी है जिसका कई ग्रंथों में उल्लेख भी है।

जैन धर्म में धर्म का अर्थ जैन के धर्मगुरुओं की शिक्षा है। जैन दर्शन में धर्म शब्द का विशेष अर्थ गति का सिद्धांत है, जो गैर-आत्मा यानी अजीव की उपश्रेणी है।

धर्म की अवधारणा वैश्विक सद्भावना के अर्थ में विभिन्न प्रतीकों के जरिए दर्शाई गई है, जैसे अशोक चक्र। भारत के राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय चिह्न में अशोक चक्र को स्थान दिया गया है।

संक्षेप में, भारतीय पंरपराओं के अनुसार धर्म एक व्यवहार का विषय है।उपनिषदों में धर्म के मार्ग पर चलने और हमेशा सच बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है और इस संदर्भ में ही इस शब्द का मुख्य अर्थ माना जाना चाहिए। धर्म का अर्थ सच्चाई और अन्य समान सदाचारों के अभ्यास के जरिए सौहार्द फैलाना है।

यह आलेख लेखक के अंग्रेजी आलेख का हिंदी अनुवाद है |

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